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Monday, June 29, 2020

#२# विश्वविद्यालय के दिन: पद्माकर द्विवेदी

धागा मोह का
भाग- २ 

कश्मीर 

.. लड़की कश्मीर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) की स्टूडेंट थी। एनआईटी और कश्मीर यूनिवर्सिटी के कैम्पस लगभग आमने-सामने ही थे। इसलिए दोनों ही इंस्टीट्यूट्स के स्टूडेंट्स एक ही साथ आए थे चैंपियनशिप में। लड़की कम्युनिकेशन साइंसेज में ग्रेज्यूएशन कर रही थी। इस दिसंबर के बाद बस एक ही सेमेस्टर बचा था उसका। फिर तो अगले कन्वोकेशन में फाइनल डिग्री मिल जानी थी उसे। उसकी उम्मीदों की डिग्री। .......उसने लड़के को बताया था कि चेनाब गर्ल्स हॉस्टल के साउथ विंग में फर्स्ट फ्लोर पर उसका कमरा था। जिसकी बॉलकनी श्रीनगर के खूबसूरत डल झील के आगे खुलती थी। लड़की अक्सर एक हाथ में कश्मीरी कहवे का प्याला और दूसरे हाथ में कोई क़िताब लेकर उसी बालकनी में घण्टों बैठी रहती। वह डल झील में मंथर गति से चलते शिकारे को देखा करती और उन प्रेमी जोड़ों को भी जो अपनी नई-शादियों के बाद अपने मधु-उत्सव के लिए यहां आया करते थे। वह दूर बैठकर उनकी उमंगों को साफ़ पढ़ सकती थी। जब कभी पश्चिम में डल झील के पानी में सूरज डूबता तो कई बार उसका दिल भी उसके साथ डूब जाता। उसके अपने कैंपस में ही चिनार के सैकड़ों दरख़्त थे। सर्दियों में जब सारे पत्ते झर जाते थे तो लड़की को उन सूखे पत्तों पर चलना बहुत पसंद था। उसने कहा था-"ये पत्ते एक दिन मिट्टी हो जाएंगे और किसी बारिश में यही पत्ते मिट्टी बनकर कभी झील में घुल जाएंगे। जैसे हमारी स्मृति एक वक़्त के बाद सोग बनकर हमारे ही भीतर घुल जाती है। उसने बहुत अधिक तो नहीं बताया था अपने बारे में पर लड़के को अहसास था कि कुछ तो ख़ालीपन रहा होगा उसकी ज़िंदगी में।

लड़की साइंस की स्टूडेंट थी पर उसे म्यूज़िक,कविता और ओरेशन में भी इंटरेस्ट था। उस रोज़ पीले कमीज़ और सलवार में वो लड़के को ऐसे लग रही थी जैसे पंजाब के ही किसी गाँव की तलहटी में किसी खेत में खिला हुआ सूरजमुखी का फूल। उसे लगता जैसे लड़की की धनुषाकार पलकों में चाँद ने अपने सारे अमावस छुपा रखे हों। उसके खुले हुए गेसू जैसे घटाओं से मिलकर बारिश की साज़िश रच रहें हों। उसे कश्मीरी शायर आगा हस्र कश्मीरी का वो कहा हमख्याल हो आया कि "ये खुले-खुले से गेसू इन्हें लाख तू सँवारे। काश ये मेरे हाथ से संवरते तो कुछ और बात होती।" लड़की ने पतले स्ट्रिप वाले फ्लैटन हील की ब्लैक कश्मीरी सैंडल पहन रखी थी। गोया कोई गिलहरी उसके पाँवों से लिपट कर अठखेलियाँ कर रही हो। उसके कर्ण-पटों पर लटकते हुए वर्तुल ईयर रिंग्स ऐसे थे जैसे उसने अपने कानों से समूचा ग्लोब ही उठा रखा हो। उसके गालों के डिम्पल प्रीति जिंटा से भी खूबसूरत लगे थे उसे । लड़के ने उस क्षण अपने भीतर एक गहरे "काश" को महसूस किया ..! उसने यह भी अहसास किया कि उसने आज तक ख़ुद को किसी के #मोह में इतना बंधा महसूस नहीं किया था। मोह के उस धागे ने उसके समूचे अस्तित्व को बाँध लिया था। वह एक गहरे मोहपाश में उतर चुका था। जिससे बाहर निकलना उससे अब सम्भव न था। यूनिवर्सिटी में बहुत लड़कियां उसकी दोस्त थीं। बराबरी के बहुत सारे रिश्ते थे । पर उसका ऐसे अहसास से गुज़रना पहली बार हो रहा था। उसने देखा कितनी ही लड़कियों के बीच वह अकेली ही ऐसी लड़की थी जिसने कोई मेक-अप नहीं किया था। साधारण का ऐसा असाधारण उसने अब तक न देखा था। उसने उसे जब भी देखा हमेशा सबसे अलग और एकांत में ही बैठे देखा। इन सबसे ज़्यादा उसको सम्मोहन था उसकी निर्दोष- चपल -मुस्कान का। एक बच्चों सी मासूम हँसी हर वक़्त उसके चेहरे पर तैरती रहती थी। वह लड़की की इस सादगी के आकर्षण से खुद को बचा न सका।

उसे अहसास हो गया था कि शायद वह प्यार में है..!!

लड़के ने गेस्ट हाउस के बूथ से दिल्ली में होस्टल के अपने दोस्त को फ़ोन किया। वह अपनी खुशी और भावनाओं का इजहार करना चाहता था। उधर दोस्त को उम्मीद थी कि लड़का कॉम्पीटिशन के बारे में अपनी तैयारी को लेकर बात करेगा। लड़के ने छूटते ही कहा। यार पार्टनर.! मुझे लगता है.. मैं प्यार में हूँ। दोस्त हँसते-हँसते पीसीओ बूथ पर ही लगभग ढह गया। होस्टल में दोस्त ऐसे ही होते हैं। ख़ासकर ऐसे मामलों में। दोस्त ने कहा-"तुम और प्यार।" असंभव..! उसने लड़के से पूछा- आर यू सीरियस। लड़के ने जवाब दिया -" आय अम डैम सीरियस यू फकिंग। तुम्हें आज तक कभी मेरी किसी बात का यकीन हुआ है?" लड़के को नाराज देखकर दोस्त ने अपने को रोककर थोड़ी गम्भीरता से कहा-"सॉरी दोस्त। मैं तो यूँही मज़ाक कर रहा था।" बोलो क्या कह रहे थे ? लड़के ने कहा-" कुछ नही। गो टू हेल एंड जस्ट यूज योर फकिंग हैंड्स।" यह कहकर उसने फोन काट दिया था। उसे दोस्त का मज़ाक करना नागवार गुजरा था। उसने बूथ वाले को पैसे दिए और उखड़े हुए मूड के साथ अपने कमरे पर वापस आ गया।

सुबह के आठ बज रहे थे। दो घण्टे बाद दस बजे तक सारे प्रतिभागियों को डिबेट का विषय दे दिया जाएगा। फिर अगले दिन औपचारिक रूप से दस बजे से शुरू होगी वह सातवीं अखिल भारतीय वक्तृत्व स्पर्धा। वह चैंपियनशिप जिसका उद्घाटन पंजाब के गवर्नर करने वाले थे और जिसमें उन सारे स्टूडेंट्स में से किसी एक को चमचमाती ट्रॉफ़ी मिलनी थी, और साथ में 1 लाख रुपए का कैश प्राइज़ भी। लड़के ही क्या प्रतिभागियों के लिए भी इसका आकर्षण कम न था।
लड़के के पास कुल जमा लगभग 24 घण्टे थे और उसे प्रेम और स्पर्धा दोनों की परिणति तक जाना था। लड़के को एक आग के दरिया में डूब कर जाना था ...🍁🍁🍁

(क्रमशः)

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